हम सपने बेचना जानते हैं

खुद को सपनों का सौदागर कहलाने से हमें परहेज नहीं। हम तो ये सोच-सोचकर ही खुश हो जाया करते हैं कि हम सपने बेचना जानते हैं। इस कारोबार में हमारा कोई सानी नहीं क्योंकि हम न सिर्फ सपने दिखाते हैं बल्कि उन्हें पूरा करने की कूव्वत भी रखते हैं। जिन्हें पूरा नहीं करते उनके लिए हम माफी मांग लेते हैं क्योंकि ये आसान रास्ता है अपने पापों के प्रायश्चित करने का।

टिप्पणियाँ

Rajesh Tripathi ने कहा…
क्या बात है, जोर-ए- कलम और ज्यादा. आमीन.....

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Social media: Opportunity and challenges for corporates