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हम सपने बेचना जानते हैं

खुद को सपनों का सौदागर कहलाने से हमें परहेज नहीं। हम तो ये सोच-सोचकर ही खुश हो जाया करते हैं कि हम सपने बेचना जानते हैं। इस कारोबार में हमारा कोई सानी नहीं क्योंकि हम न सिर्फ सपने दिखाते हैं बल्कि उन्हें पूरा करने की कूव्वत भी रखते हैं। जिन्हें पूरा नहीं करते उनके लिए हम माफी मांग लेते हैं क्योंकि ये आसान रास्ता है अपने पापों के प्रायश्चित करने का।

बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले

बहुत निकले मेरे अरमान, फिर भी कम निकले...। इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में काम कर रहे बंधुओं को अक्सर ये शिकायत रहती है कि उनकी स्टोरी को वो फुटेज या लेंथ नहीं मिली जिसके वे हकदार थे अब उन्हें कौन समझाए कि भाई इस माध्यम की सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि आपको कम-से-कम समय में 'गागर में सागर' भरने की कला आनी चाहिए। वैसे अगर आपकी कहानी बिकने लायक है तो आपको 'राई का पहाड़' बनाने की छूट भी मिल जाती है। आखिर सवाल टीआरपी का है और इसके सामने सारे तर्क फीके पड़ जाते हैं।