कुछ तो लोग कहेंगे...
राहुल देव बर्मन के संगीत से सजी और आनंद बख्शी की कलम से लिखी फिल्म अमर प्रेम के इस गीत का हमसे बड़ा ही गहरा नाता है। हमलोग कहने और सुनाने में उस्ताद हैं..कुछ करने में नहीं,क्यों..क्योंकि कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना..करना नहीं...कुछ करेंगे तो फिर बहुतों की सुननी पड़ेगी,बहुत कम ही होंगे जो आपके मन की कहेंगे और बहुत सारे होंगे जो अपने मन की कहकर आपके मन को व्यथित करेंगे लेकिन शुरुआत में ही बड़े प्यार से कह देंगे..बुरा मत मानना...। कुछ ढीठ किस्म के लोग तो इस औपचारिकता को भी नहीं निभाएंगे बस कह देंगे.. मौके-बेमौके.. बिना लाग-लपेट...ऐसे महान लोगों के सानिध्य में ज्यादा दिन रहने और इन्हें ज्यादा दिन झेलने के बाद आपकी सहनशीलता का कोटा बहुत जल्द एक्सपायरी डेट पर पहुंच सकता है और बहुत जल्दी आप भी बिना मखमल लपेटे लोगों को जूता मारने की हिंसक कला में प्रवीण होने लगते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है..साफगोईपसंद लोग 'साफ दिलवाले' होने का दंभ भरते नहीं थकते तो फिर विनम्रता के साथ शब्दकोष को खंगाल कर सबसे मीठे लगने वाले व्यंगबाण चुनकर निशाना साधने वालों को अपनी मेहनत बेमतलब नजर आने ...