कुछ तो लोग कहेंगे...

राहुल देव बर्मन के संगीत से सजी और आनंद बख्शी की कलम से लिखी फिल्म अमर प्रेम के इस गीत का हमसे बड़ा ही गहरा नाता है। हमलोग कहने और सुनाने में उस्ताद हैं..कुछ करने में नहीं,क्यों..क्योंकि कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना..करना नहीं...कुछ करेंगे तो फिर बहुतों की सुननी पड़ेगी,बहुत कम ही होंगे जो आपके मन की कहेंगे और बहुत सारे होंगे जो अपने मन की कहकर आपके मन को व्यथित करेंगे लेकिन शुरुआत में ही बड़े प्यार से कह देंगे..बुरा मत मानना...। कुछ ढीठ किस्म के लोग तो इस औपचारिकता को भी नहीं निभाएंगे बस कह देंगे.. मौके-बेमौके.. बिना लाग-लपेट...ऐसे महान लोगों के सानिध्य में ज्यादा दिन रहने और इन्हें ज्यादा दिन झेलने के बाद आपकी सहनशीलता का कोटा बहुत जल्द एक्सपायरी डेट पर पहुंच सकता है और बहुत जल्दी आप भी बिना मखमल लपेटे लोगों को जूता मारने की हिंसक कला में प्रवीण होने लगते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है..साफगोईपसंद लोग 'साफ दिलवाले' होने का दंभ भरते नहीं थकते तो फिर विनम्रता के साथ शब्दकोष को खंगाल कर सबसे मीठे लगने वाले व्यंगबाण चुनकर निशाना साधने वालों को अपनी मेहनत बेमतलब नजर आने लगती है और उनकी आत्मा कूड़ादान समझे जाने वाले अपने ह्रृदय के बोझ तले दम घोंटने लगती है। परिणामस्वरुप, बेलौस और बेलगाम घोड़ों की तरह शब्द भी इधर-उधर हर दिशा का रुख कर लेते हैं और फिर कुछ गिने-चुने भद्रपुरुष भीष्म पितामह की भांति आहत होकर शब्दबाणों की शैय्या पर लेटने को विवश हो जाते हैं। ऐसे ऐतिहासिक परिणाम से सबक लेकर लोग फिर से करनी से ज्यादा कथनी की महिमा में लीन हो जाते हैं। डिजिटली सोशल हो रहे इस अनसोशल समाज को भी इस रोग ने जकड़ लिया है। पोस्ट करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों पर तरह-तरह की आलोचनात्मक टिप्पणियां करने वाले सैकड़ों मिल जाएंगे। कुछ संक्षिप्त,तो कुछ बड़ी फुर्सत से छोटे से कमेंट बॉक्स की गागर में अपने कुलबुलाते हुए राजनीतिक और सामाजिक ज्ञान के सागर समेटने की कोशिश करते हुए। ऐसे महान लोगों से निवेदन है कि किसी की करनी को अपनी कथनी के बोझ से दबाने से बेहतर है कि वह अपनी लिखी हुई पोस्ट से खुद की शोभा और दूसरों का ज्ञान बढ़ाएं। ज्ञान की तलाश में मोबाइल की स्क्रीन पर टकटकी लगाए और सोशल माध्यमों को हर घंटे खंगाल रहे लोग आपका स्वागत करने को तैयार हैं पर याद रहे कि कुछ आप जैसे भी होंगे जो किसी के कुछ करने का पलकें बिछाए इंतजार कर रहे होंगे। ऑफ्टर ऑल...कुछ तो लोग कहेंगे....

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Social media: Opportunity and challenges for corporates